जी बी रोड़ पर एक दिव्यांग की कहानी
एक वयक्ति जिसका नाम बाबू है आये बाबू की कहानी सुने
बाबू ने बताया कि मेरी माँ ने मुझे जन्म दे कर छोड़कर चली गयी आपने गांव ।फिर मुझे कोठा नो 52 में लक्षमी अम्मा ने मुझे पाला पोसा 8 वर्ष तक उसके बाद मुझे कोठा न 59 में लक्षमी अम्मा ने मुझे नूर जहां अम्मा के पास छोड़ दिया और फिर में वही रहने लगा और नूर जहा अम्मा ने मुझे कहना कपड़ा जरूरत की चेज़े दिलाती थी मेने पूछा बाबू कभी तुम्हे आपने माँ की याद आती है तो बाबू ने बताया कि मुझे अब माँ के प्यार से भी ज्यादा यहां पर प्यार मिला कभी याद आयी नही मेने बाबू से पूछा कि आपकी उम्र किया है तो उन्हें बताया 48 वर्ष है अब बब्बू ने बताया कि में अभी भी 59 में रहता हूँ और मै आपको बता दो की बाबु दिव्यांग है एक पैर से मोहताज़ है इसीलिए उसकी माँ ने उसे यह छोड़कर चहली गयी थी
बाबू से मैंने पूछा मेने की आपको खाना कपड़ा जरूरत की चीज़ें कौंन देता है तो बाबू ने बताया कि यहाँ की सभी बहने मुझे कपड़ा पैसा खाना जरूरत की सभी चीज़े देती है


काफी संवदंशील लगा पढ़कर की एक माँ अपने बेटे को ऐसी परस्थिति में छोड़कर चली गयी जब उसे उसकी ज्यादा जरुरत थी ।
ReplyDeleteAab pata kaha hai oski maaa me bhi mil kar bahit dukh hoa
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