यह भी एक जिंदगी है


रिपोर्ट शहज़ाद अहमद
दिल्ली के लाल बत्ती छेत्र जी बी रोड के एक कोठे पर एक दिव्यांग वयक्ति आया जो सही तरह चल नही सकता था क्योंकि वह आपने पैरों से अपाहिज था उसका दोस्त अपनी पीठ पर लाद कर यौनकर्मी के पास अपने मनोरंजन वास्ते आया। मात्र रुपये 150 में यौनकर्मी के साथ अपनी शरीर की भूख मिटाने के लिए सौदा हुआ फिर वह कोठे के ऊपर एक छोटे से कमरे में यौनकर्मी के पास लादकर अपने दोस्त को छोड़कर आया । उसके थोड़ी देर (दस-पन्द्रह )
मिंट बाद जब वह ( दिव्यांग) कमरे से बाहर नकला तो चेहरे पर अजब सी चमक छलक रही थी






मैने उस यौनकर्मी से पूछ बैठा कि उसके पास किस किस प्रकार के वयक्ति आते है तो जवाब में वह बोली कि उसके पास तरह तरह के लोग (जैसे कि गूंगे ,बेहरे,कुबड़े,आंधे ,आदि अपने मनोरंजन के लिए हमारे पास आते है। हम उनकी काम पिपासा दूर करके संतुष्ट करती है । बदले में वह चंद रुपए देकर हमको अपना मनोरंजन बनाकर पैसे देकर चले जाते है ।  कई आते हैं फिर लौट जाते हैं और कभी कभार दुबारा लौट कर आते है । यह दृश्य मैने अपनी आंखों से देखा । इससे पता चला कि दुनिया मे ऐसे लोग भी है जिनकी पीड़ा सहकर उनको खुश किया जाता है एक यौनकर्मी अपने जीवन  की मजबूरी वश दुशरो के लिए जीती है तथा उसी में अपनी सहमति प्रकट करती है । जोकि एक बलिदान से बढ़ कर है । वाकई इन यौनकर्मियों को देख कर उनको सलाम करने का दिल करता है । आखिर वह भी समाज का एक इंसानी हिस्सा है ।

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