सेक्स वर्कर के रूम की दास्तान
शहज़ाद अहमद (नई दिल्ली) मैं जी बी रोड के एक कोठे पर गया और वहां पर सेक्स वर्कर से मिला और फिर उनकी दास्तान के बारे में मैंने पूछा उन्होंने कहा मैं यह पीड़ा सहकर रहती हूँ और मैं मार भी खाती हूं बातें भी सहती हूँ क्या करूं मेरी मजबूरी मुझे यह जिंदगी जीने को मजबूर किया गया इस समाज ने मुझे यह काम करने को मजबूर किया अपने पेट अपने बच्चों का पेट , घरवालों का पेट पालना पड़ता है इसके अलावा मेरे पास और कोई चारा ही नहीं ना तो मुझे यह समाज अपना ता है । क्या करूं मुझे यही अपनी जिंदगी काटने के लिए मजबूर हूँ कम से कम रोटी तो मिलती है मैं उस दौरान एक रूम तक पहुंचा जहां पर शाम होते ही चार चांद लग जाते हैं वह रूम जिसका एरिया 7×6 का है जिसमें एक बेड वही साइड में एक छोटा सा टेबुल हे जिसमे उनकी जरुरत की चीज है उनसे पूछा यह वही जगह है? उन्होंने कहा हां जी क्या करुं यह मुझे करना पड़ता हे यह मेरी मजबूरी है मैंने जब रूम को देखा उसके बाद जब मैं उस द्वार से बाहर निकला तो उस दीवार पर एक पेंटिंग बने हुई थी जिसमे...