जिंदगी सड़क पर जीने को मजबूर है एक सेक्स वर्कर क्या करूँ जिंदगी है तो जीना है ।
मै जी बी रोड की सड़क से गुज़र रहा था जब एक औरत ठेले पर बैठी थी ।में उनके पास गया और कहा ऑन्टी नमस्ते ,उन्होंने जवाब दिया नमस्ते बेटा । मैने पूछा ऑन्टी आप सड़क पर क्यों बैठी है तो जवाब दिया बेटा में सेक्स वर्कर हूँ । मेरी सीधी तांग टूटी हुई है और मुझे सड़क पर रहने के लिए मजबूर हूँ । मेने उनसे पूछा कि आप कोठे पर क्यों नही रहती हो। उन्होंने जवाब दिया कि मुझे कोई नही रखता ,अब तो बस यह सड़क ही मेरा घर है मैने पूछा आपकी और परिवार जीविका कैसे चलती हो ।
उन्होंने बात की में सड़क पर से ग्रहक को पकड़ कर पटा कर कोठे पर छोड़ देती हूं और अपना कमिसन ले लेती हूं । इससे मेरा पेट और ज़िन्दगी चल जाती है । मैने पुछा आपकी यह हालत कैसी हुई । उन्होंने बताया में कोठा न. 50 में रहती थी । में शराब पी रखी थी तो सीढ़ी से मेरा पैर फिसला और गिर गयी और मेरी एक टांग टूट गयी । में अस्पताल में तकरीबन एक साल रही वो भी अस्पताल के वार्ड में नही बल्कि अस्पताल के फुटपात में पड़ी रही मेरे को देखने तक जिस कोठे मे कमाती थी उस कोठे की मालकिन देखने तक नही आई और मेरी कुछ सेहली जो मेरे साथ कमाती थी वो मुझे खाना कपड़ा देना आती थी । एक साल के बाद में हल्का चलने लगी तो में वहां से वापस कोठा न. 50 में आ गई और रहने लगी । 2 महीने तक रही जीना चढ़ने नही होता था रेंग कर चढ़ती थी फिर मालकिन ने मुझे निकल दिया और में सड़क पे एक रात रही और दूसरे दिन कोठा न. 52 में रहने के लिए गयी तो उन्होंने मुझे रख लिया बस अब में ग्रहक को पटाकर कोठे तक ले जाती हूँ ।और वहां से अपना कमिसन ले लेती हूं सुबह 8 बजे कोठा न 52 कोठे से सड़क पर उतर ती हूं और रात को 12या 1 बजे सोने के लिए कोठे पर चढ़ती हूँ । सोलह घंटे सड़क पर ही रहती हूं । यह है जिंदगी किसी ने गोर से नही देखा। देखा होता तो इनका दर्द भी जान पाते ।

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