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सेक्स वर्कर ने बताया की कुछ कस्टमबरो से मिलता है दर्द

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शहज़ाद अहमद / नई दिल्ली  एक जिंदगी जीने के लिए एक सेक्स वर्कर अपने दर्दो को सहती है। मै दिल्ली के रेड लाइट एरिया जी बी रोड़ पर गया और वहां की सेक्स वर्करों से मिला । मेने एक सेक्स वर्कर से पूछा कि जहां आप काम करती है वहां पर किस प्रकार का दर्द आपको सहना पड़ता है उन्होंने बताया कि एक सेक्स वर्कर रोज़ अपने पेट की भूख मिटाने के लिए कई लोगो की जिस्म की भूख मिटाती है रोज 10 से 20 क्लिंट को खुश करके भेजती है  वही उन्होंने बताया कि कुछ ऐसे भी कस्तम्बर आते है जो हम लोगो को बहुत परेशान करते है और तंग करते है मात्र 200 रु देते है  और समझते है कि मुझे खरीद लिया है जैसा चाहूं परेसान करूँ  और कुछ ऐसे लोग भी आते है जो लगता है कि बदमाश टाइप के वह भी रुआब जमाते  है यहां हम लोगो को दो वक्त की रोटी और बच्चो को पढ़ाने के लिए यह सब दर्द ए गलियों से गुजरना पड़ता है कई कस्तम्बर ऐसे भी आते है  की 200 रु देते है हम उनको खुश भी कर देते है जब रूम से बाहर आते है तब यह कहता है कि मेरा काम नही हुआ मेरे पैसे वापस दो गुंडा गिर्दी भी करते है जिस कारण हम पैसे वापस देते है । कई कस्तम्बर ऐसे ...

सेक्स वर्कर के रूम की दास्तान

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शहज़ाद अहमद (नई दिल्ली)  मैं जी बी  रोड के एक कोठे पर गया और वहां पर सेक्स वर्कर से मिला और फिर उनकी दास्तान के बारे में मैंने पूछा उन्होंने कहा मैं यह पीड़ा सहकर रहती हूँ और  मैं मार भी खाती हूं बातें भी सहती हूँ क्या करूं मेरी मजबूरी मुझे यह  जिंदगी जीने को मजबूर किया गया  इस समाज ने मुझे यह काम करने को मजबूर किया अपने पेट अपने बच्चों का पेट , घरवालों का पेट पालना पड़ता है इसके अलावा मेरे पास और कोई चारा ही नहीं ना तो मुझे यह समाज अपना ता है । क्या करूं मुझे यही अपनी जिंदगी काटने के लिए मजबूर हूँ  कम से कम रोटी  तो मिलती है  मैं उस दौरान एक रूम तक पहुंचा जहां पर शाम होते ही चार चांद लग जाते हैं  वह रूम जिसका  एरिया 7×6  का है जिसमें एक बेड  वही साइड में एक छोटा सा टेबुल  हे  जिसमे उनकी जरुरत की चीज  है उनसे पूछा यह वही जगह है?  उन्होंने कहा हां जी क्या करुं यह मुझे करना पड़ता हे यह मेरी मजबूरी है मैंने जब रूम को देखा उसके बाद जब मैं उस द्वार से बाहर निकला तो उस दीवार पर एक पेंटिंग बने हुई थी जिसमे...

एक माँ यहाँ पर भी

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में दिल्ली के रेड लाइट एरिया जी बी  रोड पर पहुँचा  यह जानने के लिए यहाँ पर भी सेक्स वर्करो को माँ का प्यार मिलता है या नही में कोठा न 59 मे गया और वहां पर एक सेक्स वर्कर से मिला जिसका बदला हुआ नाम मीना था । मैने उनसे पूछा आपके बच्चे है तो उन्होंने बताया कि मेरे दो बेटे है जो कि वो अभी पढ़  रहे है  तो मैने कहा आपके बच्चे आपके साथ रहते है तो उन्होंने कहा मेरे बच्चे मासी के घर पर रहते है  । मैने पूछा आपके बच्चे कोनसी क्लास में है तो उन्होंने बताया कि एक बेटा 10 में है और दूसरा 6 th में । उन्होंने कहा आज मेरे बच्चो ने मुझे बहुत प्यार दिया और उन्होंने अंग्रेज़ी में Happy mothers day बोला . मुझसे उन्होंने पूछा इसका मतलब किया होता है तो मैने कहा माँ का दिन होता है । सेक्स वर्कर ने कहा की मेरी मजबूरी ने मुझे इस दलदल में ला दिया लेकिन आपने बच्चो को पढ़ा लिखा कर  अच्छा बनाना चाहती हूँ मेरा बड़ा बेटा डॉ बनना चाहता है और छोटा बेटा आर्मी में जाना चाहता है देश की सेवा करना चाहता है । में पूरी मेहनत करके आपने बच्चो को जो उनकी इच्छा है वो जरूर बनाओ गी । एक माँ अपने ...

जी बी रोड के कोठे से वेश्या की दर्द भरी दास्तान

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वेश्यावृत्ति के प्रति समाज  का  हमेशा से दोहरा रवैया रहा है। समाज मे दिखावे के लिए ऊपरी तौर पर सभी वेश्यावृत्ति के खिलाफ नजर आते है । लेकिन बन्द कमरो के पीछे वेश्यावृत्ति को फैलाने में वही सहायक होते है । जिन्हें हम हिकारत की नजर से देखते है और समझते है कि यह समाज इंसानियत के नाम पर एक कलंक है परंतु कभी आपने यह जानने की कोशिश की है? कि यह समाज यह काम क्यों करता है इनकी किया मजबूरी है इन्हें इस काम को करने के लिए किसने मजबूर किया है इस काम को धृणित क्यों समझा जाता है जो भी महिला या महिलाये वेश्या के धंधे को अपनाती है वह इस धंधे में कैसे लाई जाती है और इन्हें यह काम करने के लिए कोन मजबूर करता है । और इस काम को हम जो आपने आपको सभ्य समाज के सदस्य समझते है क्यों हिकारत से इनको देखते  है । शाम ढलते ही शमा जल उठती है । गरीबी और मजबूरी ने बनाया वेश्या जी बी रोड एक कोठे पर तकरीबन 30 से 38 सालो से देहव्यापार कर रही है जिसका बदला हुआ नाम रेशम है आज  उम्र के उस पड़ाव पर पहुँच चुकी है जहाँ वह आने शरीर को बेचकर पैसा कमाने में असमर्थ है जब रेशम जी बी रोड पर आई थी तब जवानी ...

जिंदगी सड़क पर जीने को मजबूर है एक सेक्स वर्कर क्या करूँ जिंदगी है तो जीना है ।

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मै जी बी रोड की सड़क से गुज़र रहा था जब एक औरत ठेले पर बैठी थी ।में उनके पास गया और कहा ऑन्टी नमस्ते ,उन्होंने जवाब दिया नमस्ते बेटा । मैने पूछा ऑन्टी आप सड़क पर क्यों बैठी है तो जवाब दिया बेटा में सेक्स वर्कर हूँ  । मेरी सीधी तांग टूटी हुई है और मुझे सड़क पर रहने के लिए मजबूर हूँ । मेने उनसे पूछा कि आप कोठे पर क्यों नही रहती हो। उन्होंने जवाब दिया कि मुझे कोई नही रखता ,अब तो बस यह सड़क ही मेरा घर है मैने पूछा आपकी  और परिवार जीविका कैसे चलती  हो । उन्होंने बात की में सड़क पर से ग्रहक को पकड़ कर पटा कर कोठे पर छोड़ देती हूं और अपना कमिसन ले लेती हूं । इससे मेरा पेट और ज़िन्दगी चल जाती है । मैने पुछा आपकी यह हालत कैसी हुई । उन्होंने बताया में कोठा न. 50 में रहती थी । में शराब पी रखी  थी तो सीढ़ी से मेरा पैर फिसला और गिर गयी और मेरी एक टांग टूट गयी । में अस्पताल में तकरीबन एक साल रही वो भी अस्पताल के वार्ड में नही बल्कि अस्पताल के फुटपात में पड़ी रही मेरे को देखने तक जिस कोठे मे कमाती थी उस कोठे की मालकिन देखने तक नही आई और मेरी कुछ सेहली जो मेरे साथ कमाती थी वो मुझे...

यह भी एक जिंदगी है

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रिपोर्ट शहज़ाद अहमद दिल्ली के लाल बत्ती छेत्र जी बी रोड के एक कोठे पर एक दिव्यांग वयक्ति आया जो सही तरह चल नही सकता था क्योंकि वह आपने पैरों से अपाहिज था उसका दोस्त अपनी पीठ पर लाद कर यौनकर्मी के पास अपने मनोरंजन वास्ते आया। मात्र रुपये 150 में यौनकर्मी के साथ अपनी शरीर की भूख मिटाने के लिए सौदा हुआ फिर वह कोठे के ऊपर एक छोटे से कमरे में यौनकर्मी के पास लादकर अपने दोस्त को छोड़कर आया । उसके थोड़ी देर (दस-पन्द्रह ) मिंट बाद जब वह ( दिव्यांग) कमरे से बाहर नकला तो चेहरे पर अजब सी चमक छलक रही थी मैने उस यौनकर्मी से पूछ बैठा कि उसके पास किस किस प्रकार के वयक्ति आते है तो जवाब में वह बोली कि उसके पास तरह तरह के लोग (जैसे कि गूंगे ,बेहरे,कुबड़े,आंधे ,आदि अपने मनोरंजन के लिए हमारे पास आते है। हम उनकी काम पिपासा दूर करके संतुष्ट करती है । बदले में वह चंद रुपए देकर हमको अपना मनोरंजन बनाकर पैसे देकर चले जाते है ।  कई आते हैं फिर लौट जाते हैं और कभी कभार दुबारा लौट कर आते है । यह दृश्य मैने अपनी आंखों से देखा । इससे पता चला कि दुनिया मे ऐसे लोग भी है जिनकी पीड़ा सहकर उनको खुश किया जाता...

कोठे की सीढ़ी पर सेक्स वर्कर

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मैं आज जी बी रोड के रस्ते से गुज़रा और वहाँ पर मेने देखा की कोठे की सीढ़ी पर और ब्रांडो पर सेक्स वर्कर्स खड़ी और बैठी दिखी। मैं एक सेक्स वर्कर से मिला जिसका नाम रेशमा था मैंने पूछा की आप सड़क पर और बरामदों में क्यों खड़ी  हो तो रेशमा ने बताया की मेरी उम्र ५० वर्ष है में ऊपर कोठे में बैठ  जाओ तो मेरा पेट किसी पालूंगी मेरी उम्र घट गयी है कस्टममर कहता है तुम मेरी माँ जैसी हो।  तो इस मज़बूरी में मुझे सड़क पर खड़ी रहती हूँ और ग्राहको को पटाती हूँ कहती हूँ चल मेरे साथ में लड़की दूंगी तो ग्राहकं चल पड़ता है और में ऊपर कोठे पर ला कर लड़की के पास भेज देती हूँ और अपना कमिशन ले लेती हूँ ऐसे हम अपना पेट पालते है  क्यों की हमरी उम्र हो गयी है। रेशम सीढ़ी  पर ही खाना खा रही थी एक पिलेट में दाल  चावल और आम का अचार था और एक बोलत थी पानी की उस पिलेट पर मख्खी भिन भीरा रही थी देखा की एक पिलेट में तीन लोग खा रहे थे जो की वह एक ही आदमी का खाना था. उन्होंने मुझसे कहा आइए आप भी खा ले तो मेने कहा में खा खाना खा चूका हूँ आप खाये तो सेक्स वर्करो ने कहा की आप कहाँ यह खाना खायेगे आप तो टे...